मेरी एक नयी दोस्त ने मुझसे पूछा
माता पिता लखनऊ जा रहे हैं
कुछ मंगवाना था वहां से क्या ?
मैंने चंद लम्हात सोचा
वहां की ठंड को याद करते हुए
सोचा कि क्या मँगवाउ जो काफी दिनों तक खर्च न हो
और रिस रिस कर मुझे तरोताजा करता रहे
तो सोचते सोचते सोचा कि चलो बचपन कि कुछ यादें मंगवाते हैं
और जवाब में लिखी यह फेहरिस्त ........
लम्बी ठंडी रात के बाद निकली हुई सूरज की सेंक
मुंदी आँखों के साथ सुबह की वह कश्मकश
उठूं या थोड़ी देर और सो लूँ वाली उधेड़बुन
कपास की रुई वाली उन मोटी रजाईयों की गर्माहट
मिटटी के प्याले में गुनगुनी अदरक तुलसी वाली चाय के साथ
माथे को सहलाते माँ के वो हाथ
और उसके साथ छन छन कर आती
थोड़ी सी वोह सर्दी वाली धूप
मंगवानी थी
हो सके तो ले आना
सवेरे का वोह ढीठ कोहरा
लेकिन कोहरे में भी दिखता मिश्रा जी का चार मंजिला मकान
सन्नाटे में धीरे धीरे आते स्कूल के रिक्क्षे की आवाज़
और उस सन्नाटे को चीरती हुई फज्र की अज़ान
फिर ढाई किलो डाँट खा कर हम भाई बहन बेईमान
धीरे धीरे बिस्तर से सरकते मगर
बहुत ठंडी का बहाना कर फिर से कम्बल में घुस जाते
फिर गिरते पड़ते स्कूल टाइम पे पहुंचने की दौड़
और लेट होने पर बड़े मैदान के चार चक्कर की कौड़
और उस कारण स्ट्रिक्ट वाली वर्षा मैडम का क्लास मिस होने की ख़ुशी
मंगवानी थी हो सके तो ले आना
थोड़ी से वोह सर्दी वाली धूप मंगवानी थी
हो सके तो ले आना
मीठी गाजर का गरमा गरम हलवा और उस पर खोये की परत
मूंग दाल की बड़ियाँ, पुदीने की चटनी और उनके साथ वाली गपशप
धूप में बैठ कर सरसों के तेल की चम्पी
दिन ढलने से पहले काम ख़तम करने की माँ की धमकी
ऊँन के स्वेटर बुनती हमारी सलोनी दीदी की झटपट चलती उंगलियां
उनको देख कर मोहल्ले के लड़को की ख़याली पुलाओ पकाती दिमाग की गालियां
शाम के चित्रहार के लिए टीवी के सामने वाली जमघट
धुंध गहराने से पहले पापा के स्कूटर की आहट
और उस आहट से मिली सुकून की वोह साँसे
मंगवानी थी, हो सके तो ले आना
थोड़ी सी वोह सर्दी वाली धूप मंगवानी थी
हो सके तो ले आना
रेत में भुंजती मूंगफलियों की खनखनाहट
रात के खाने में मक्के की रोटी और सरसों के साग का थाल
कोयले वाली अंगीठी की तपिश में अंताक्षरी की गुनगुनाहट
परिवार और दोस्तों संग हसी ठट्टे, और हँसी से लाल हमारे गाल
होमवर्क करते करते झपकी के साथ
उठने वाले पापा के ठन्डे ठन्डे हाथ
थप्पड़ खा कर मुँह फुलाये, हम फिर से किताब के पास
और किसी के देखने से पहले उलटी किताब को झट सीधा करना
और इसे देख कर चश्मे के पीछे से उनकी मुस्कुराती आँखों की आस
मंगवानी थी, हो सके तो ले आना
थोड़ी सी वोह सर्दी वाली धूप मंगवानी थी
हो सके तो ले आना
दादी माँ के झुर्रियों वाले नरम हाथ
और उन हाथों से बने मिर्ची लहसुन के अचार का स्वाद
उनकी कोठरी में मिट्टी के मर्तबानों से चुराते मुरब्बे
लेकिन डाँट के बजाय मिलता उनका ढेर सारा आशीर्वाद
किसी से मिलने मिलाने पर
गुड़ वाली गजक की मिठास
तिल के लड्डुओं का स्वाद वोह ख़ास
मौसी की कुरकुरी कचौड़ियों और आँवले की चटनी की झांस
मंगवानी थी, हो सके तो ले आना
थोड़ी सी वोह सर्दी वाली धूप मंगवानी थी
हो सके तो ले आना..........
थोड़ी सी वोह सर्दी वाली धूप
मंगवानी थी
हो सके तो ले आना...........